कुछ मज़ेदार चुटकियां लेते हुए पैट्रिक चप्पाट्टे आम लगने वाले कार्टूनों के पक्ष मे पुरज़ोर द्लील रखते हैं. उनके लेबानान, पश्चिम अफ़्रिका और ग़ाज़ा के प्रोजेक्ट दर्शाते हैं, कि सही हाथों में पेन्सिल न केवल गंभीर विषयों को उजागर करती है, बल्कि साथ होने की कोई गुंजाइश नहीं रखने वालों को भी एकसाथ ले आती है.
