टेम्पल ग्रैन्डिन, जो कि बचपन से औटिस्म से ग्रस्त है, अपनए दिमाग की कार्यशैली के बारे मे चर्चा कर रही हैं --वह बता रही हैं कि कैसे उनकी "तस्वीरो मे सोचने की क्षमता" ने उन्हे उन समस्याओ का समाधान ढूढ़ने मे मदद दी जिन्हे अक्सर बाकि Neurotypical(वे जिन्हे औटिस्म नही है) दिमाग नही देख पाते हैं । वे कह्ती है कि दुनिया को औटिस्म स्पेक्ट्र्म से सोचने वाले व्यक्तियों की भी ज़रूरत है : दृश्य विचारकों, पैटर्न विचारकों, मौखिक विचारकों, और स्मार्ट और तेज़ बच्चों को सभी प्रकार की।
