परमाणु बम के आविष्कार के साथ, मानवता को हमारे इतिहास में पहली बार ख़ुद को नष्ट करने की ताक़त मिली। तब से, हमारे विलुप्त होने या सभ्यता का पतन होने का ख़तरा लगातार बढ़ा है। हमारी ख़ुद को नष्ट करने की आखिर कितना संंभावना है? और हमारे अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा ख़तरा क्या है? चार अस्तित्व-संबंधी ख़तरों पर ग़ौर करें और पड़ताल करें कि हम अपना भविष्य कैसे सुरक्षित कर सकते हैं। [निर्देशन -रेज़ा रिआही, वाचन - बेथनी कटमोर-स्कॉट, संगीत - आंद्रे एइरिस]
