लोग इस बात को लेकर चिंतित होते जा रहे हैं कि आज जिन खतरों का हम सामना कर रहे हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन और बढ़ती असमानताएँ, उनको किसी भी पूंजीवादी व्यवस्था द्वारा हल नहीं किया जा सकता। तो क्या यह सत्य है? और अगर हाँ, तो क्या हम पूंजीवाद को ठीक कर सकते हैं, या क्या हमें प्रणाली को तितर-बितर कर, शुरू से एक नई प्रणाली बनाने की ज़रूरत है? भिन्न प्रकार के पूंजीवाद और उनकी हमारे समाज में भूमिका का अन्वेषण कीजिए। [लोरेंजो मर्कैंटी, AIM Creative Studios द्वारा निर्देशित, जॉर्ज ज़ैदान द्वारा वर्णित, संगीत आन्द्रे एयर्स द्वारा]
