जब मार्च २०१४ में इबोला का प्रकोप छाया, पर्डिस सबेटी और उनकी टीम को वाइरस के जीनोम का अनुक्रमण करना था, सीखना था कि यह कैसे परवतिर्त होते हैं और फैलते हैं। सबेटी ने तुरंत ही अपने अनुसंधान को वेब में जारी किया, ताकि दुनिया भर के वाइरस ट्रैकर्स और वैज्ञानिक इस तत्काल लड़ाई में शामिल हो सकें। इस बातचीत में, वह दिखाती हैं कि सबका सहयोग ही कुंजी है वाइरस को रोकने के लिए--और लड़ने के लिए आगे आने वाले हमलों से। सबेटी ने कहा,"हमने खुले तौर पर काम किया, साझा किया और साथ काम किया"। "हमे दुनिया को एक वाइरस के विनाश से नहीं, पर अरबों दिलों और दिमागों की एकता से परिभाषित करना है"।
