भावनाएँ होना कोई कमज़ोरी नहीं है, उनका मतलब है हम इंसान हैं, ऐसा कहना है निर्माता और समाज सेविका निक्की वेबर ऐलन का। यह पता चलने के बाद की उन्हें डिप्रेशन है, ऐलन शर्म की वजह से काफ़ी समय तक चुप रही हैं जब तक उनके काफ़ी क़रीबी परिवार के सदस्य की अचानक मिरत्यु ने उन्हें झँझोर दिया। दिमाग़ी तंडरुस्ती पर उनकी यह वार्तालाप में उन्होंने बताया अपने संघर्ष के बार में। वो सामाजिक सतिथियाँ जो डिप्रेशन को कलंक समझती हैं, कमज़ोरी समझती हैं, और उन्हें मदद लेने से रोकती हैं, वो सतिथियाँ बदलनी चाहियैं।
