जल्दी नहीं -- सोचकर असफल हो
अक्सर उन बड़े व्यवसायिओं की बात होती हैं जिनकी मेहनत और लगन से उन्हें सफलता प्राप्त हुई, लेकिन जो असफल रहे, उनका क्या? अधिकतम तौर से वे शर्मिन्दगी के कारण अपनी कहानियाँ किसी को नहीं बताते -- और यह भूल जाते हैं कि वह एक तरह से आगे बढ़ने का मौका भी बन सकता है, लेखक और व्यवसायी लेटीशिया गास्का कहती हैं। इस विचारशील टॉक में, गास्का व्यवसायिओं को अपने असफलता के किस्सों को बाँटने को प्रोत्साहित करती हैं, और सुझाव देती हैं कि जल्दी असफल नहीं, सोचकर असफल हो।
