"सह-परवरिश"एक बहुप्रचलित नहीं है -- यह अपने परिवार की परवाह करने का खुला, समनुरूप, स्नेहपूर्वक माध्यम है, कहते हैं स्टोरीटेलर और पिता जोएल लिऑन। अपने मर्मस्पर्शी भाषण में वे माता-पिताओं को अपने बच्चों की परवरिश में समान बलिदान करने की चुनौती देते हैं, ख़ास कर ऐसी दुनिया में जहाँ बलिदान का बोझ अधिकतर स्वयं माँ को उठाना पड़ता है। लिऑन परवरिश के विषय में बारीक़, व्यावहारिक चर्चाओं को प्रोत्साहन देते हुए हमें याद दिलाते हैं कि परवरिश एक ज़िम्मेदारी नहीं बल्कि एक अवसर है।

