100 मिलियन लोगों को आवास उपलब्ध कराने की एक साहसिक योजना
मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, पूरे भारत के सभी प्रमुख शहरों में एक बात आम हैैै — वे काम की तलाश में पहुँचने वाले लोगों का स्वागत करते हैं। लेकिन इस तरह के खुलेपन और स्वीकृति के दूसरे ओर क्या है? अफसोस की बात है, लगभग 100 मिलियन लोगों के लिए आवास की कमी है, जिनमें से कई अवैध बस्तियों में रहते हैं। डॉ गौतम भन, एक मानव बस्ती विशेषज्ञ और शोधकर्ता, निर्भीकता से इस समस्या का एक समाधान सोच रहे हैं। वह हमारे साथ शहरी भारत के एक नए नज़रिए को साझा करते हैं, जहाँ हर किसी के पास एक सुरक्षित, और मजबूत घर हो।

