(अभी भी) उपनिवेशवाद को रूमानी पक्ष से क्यूँ देखा जाता है?
फ़रीश अहमद-नूर जी कह रहे हैं कि उपनिवेशवाद वर्तमान में भी हमें हानि पहुँचा रहा है। जिन लोगों ने उसे बनाया उनको पीछे छोड़के अभी भी हमारी कथाओं एवं हमारी सोच में मिल-जुलकर हमें तंग कर रहा है। यह पूर्वधारणाऐं अभी भी क्यूँ रहती हैं, और कभी-कभी कामयाब क्यूँ होती हैं, इसकी जाँच करते हुए, फ़रीश जी कहते हैं कि हमें हर तरफ़ से इस सोच को त्यागना होगा जिससे लोग इसको अच्छा समझना बंद करें, और ऐसा कभी फ़िर ना हो।

