क्या बताएँगे आप अपनी बेटियों को २०१६ के बारे में?
शीशे के टुकड़ों की तरह शब्दों का प्रयोग कर चीनाका हौज ने खोल डाला २०१६ और हिंसा, शोक, डर, शर्म, साहस और उम्मीद के १२ महीने बिखेर के रख दिए इस मूल कविता में उस साल के बारे में जो हम में से कोई जल्दी नहीं भूल पायेगा

