हमारा जीवन और हमारी संस्कृतियां एक-दूसरे में घुलती-मिलती कहानियों से बने हैं. उपन्यासकार चिमामांडा अडीची बता रहीं हैं कि उन्हें अपनी संस्कृ्ति का सच्चा पक्ष कैसे मिला -- वे हमें यह चेतावनी भी देतीं हैं कि यदि हम किसी व्यक्ति या देश के बारे में मात्र एक तरह की कहानी ही सुनते रहेंगे तो हमारी आलोचनात्मक दृष्टि धूमिल पड़ जाएगी.
