एंबर केस बताती हैं कि टैक्नोलॉजी हम सबमें बदलाव ला रही है. अब हम स्क्रीन को घूरते हुए बटन दबाते रहनेवाले होमो सैपियेंस बन गए हैं. संवाद स्थापित करने, याद रखने, यहां तक कि एक दूसरा जीवन जीने के लिए हम अब "बाह्य मष्तिष्क" (सैलफ़ोन और कम्प्यूटर) पर निर्भर रहते हैं. लेकिन क्या ये मशीनें हमें एक-दूसरे से जोड़ेंगीं या हमपर जीत हासिल कर लेंगीं? केस हमारे साइबोर्ग आत्म के बारें में हमें आश्चर्यजनक जानकारी देतीं हैं.

